मंगलवार, 7 मार्च 2023

निक वुईचिक: Nothing is impossible

 

                                                                                                                  Image Credit: Original Owner

जब हमारे सामने कोई विपत्ति आती है तो हम घबरा जाते हैं। हार मान लेते हैं। ऐसा मेरे साथ ही क्यों होता है? ऐसे नकारात्मक विचारों से हम घिर जाते हैं। लेकिन आज हम ऐसी शख्सियत से आपका परिचय करवा रहे हैं जो पैदा ही अभावों के साथ हुआ लेकिन आज सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला लेखक, मोटिवेशनल स्पीकर, मेंटॉर है.....जिनका नाम है निक वुईचिक। 

निक का जब जन्म हुआ तो नर्स ने मां को बच्चा सौंपा तब मां बच्चे को देखकर घबरा गई और बच्चे को लेने से इनकार कर दिया। क्योंकि बच्चे के न तो दोनों हाथ थे और ना ही दोनों पैर। नॉर्मल होने के बाद मां ने बच्चे को स्वीकार किया। 4 दिसंबर,1982 को  मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया में जन्मे निक के इन विकारों को सुधारने में कई डॉक्टर असफल रहे।आज भी निक बिना हाथ पैरों के अपना जीवन सफलतापूर्वक जी रहे हैं। 

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जीवन संघर्ष

उनके माता-पिता उन्हें हर तरह से आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे इसलिए निक को स्पेशल स्कूल में भर्ती करवाने से मना कर दिया और सामान्य स्कूल में भर्ती करवाया। इसका फायदा यह हुआ कि वे सामान्य बच्चों की तरह जीवन जीने लगे। बचपन में ही उसे तैरना सिखाने लगे। मात्र 6 साल की अवस्था में पंजे की सहायता से टाइपिंग सिखाने लगे। प्लास्टिक की एक ऐसी डिवाइस बनवाई जिसकी सहायता से पेन पेंसिल पकड़कर लिखना सीख सकें।

आत्महत्या की कोशिश :

निक का जीवन काफी संघर्षपूर्ण था। हम अंदाजा लगा सकते हैं कि जिस व्यक्ति के हाथ-पैर दोनों नहीं हो, उसका जीवन कितना चुनौतीपूर्ण रहा होगा। स्कूली जीवन में उन्हें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बच्चे उनका मजाक उड़ाया करते थे। साथियों के साथ वे खेल भी नहीं पाते थे। इन सब मुसीबतों के चलते निराश होकर उन्होंने आत्महत्या करने की सोची और एक पानी से भरे टब में जाकर  कूद गए। समय रहते उन्हें बचा लिया गया।

जीवन की दिशा बदल गई:


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जब निक की उम्र तेरह साल थी तो एक दिन उनकी माँ ने अख़बार में प्रकाशित एक लेख निक को पढ़कर सुनाया जिसमें एक विकलांग व्यक्ति के जीवन संघर्ष और सफलता की कहानी थी। निक को अहसास हुआ कि दुनिया में वह अकेला विकलांग व्यक्ति नहीं है और मेहनत व संघर्ष के रास्ते आगे बढ़ा जा सकता है। उसके बाद उसके जीवन की दिशा ही बदल गई। उसे महसूस हुआ कि ईश्वर ने उसे कुछ विशेष करने के लिए ही ऐसी स्थिति में डाला है। उसे तो स्वयं प्रेरणा व प्रोत्साहन की ज़रूरत थी लेकिन उसने संकल्प लिया कि वह स्वयं लोगों को प्रेरित और प्रोत्साहित करेगा जिससे लोगों में व्याप्त निराशा व अकर्मण्यता दूर हो सके और वे उत्साहपूर्वक कार्य करते हुए अच्छी तरह से जीवन व्यतीत कर उसका आनंद ले सकें ।

निक को हमेशा आश्चर्य होता था की वे दूसरो से अलग क्यों है? वे बार-बार अपने जीवन के मकसद को लेकर प्रश्न पूछा करते थे। उनका कोई उद्देश्य है या नही ,ये प्रश्न भी अक्सर उन्हें परेशान करते थे।

निक कहते हैं - "आज उनकी ताकत और उनकी उपलब्धियों का पूरा श्रेय भगवान पर बने उनके अटूट विश्वास और श्रद्धा को जाता है। अपने अब तक के जीवन में जिनसे भी मिले फिर चाहे वह फ्रेंड हो, रिश्तेदार हो या सहकर्मी हो, उन सभी ने उन्हें काफी प्रेरित किया है।"

करियर:

19 साल की आयु में अपने पहले भाषण से लेकर अब तक निक पूरे विश्व की यात्रा कर रहे है और अपनी प्रेरणादायी घटनाओ से लोगो को प्रेरित कर रहे है।विश्व भर में आज निक के करोड़ों अनुयायी है, जो उन्हें देखकर प्रेरित होते है। आज युवावस्था में भी उन्होंने बहुत से पुरस्कार हासिल किये है। आज वे एक ऑथर, म्यूजिशियन, एक्टर है। साथ ही उनको फिशिंग, पेंटिंग और स्विमिंग में भी काफी इंटरेस्ट है। उन्होंने एटिट्यूड इज़ एल्टिट्यूड नामक कंपनी की स्थापना की । बतौर एक्टर शॉर्ट फिल्म The Butterfly Circus में काम किया।

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9 मार्च 2002 में, वह कैलिफोर्निया चले गए। 2008 में मैक्किनी, टेक्सास में उनकी मुलाकात कानाए मियाहारा से हुई। उन्होंने 12 फरवरी 2012 को उनसे शादी कर ली । निक और कानाए के चार बच्चे हैं। और दक्षिणी कैलिफोर्निया में रहते हैं।

निक जिन्होंने फिर से साबित कर दिया की इस दुनिया में  इंपोसिबल कुछ भी नहीं है। उन्होंने सिद्ध कर दिया की वो जब बिना हाथ पैर के इतना कामयाब हो सकते है। तो आप क्यों नहीं हो सकते। निक अब लोगो को मोटिवेट करते है। एक बार तो उनकी मोटिवेशनल बातें सुनने के लिए  इतने अधिक लोग (एक लाख से ऊपर) इकठ्ठा हो गए थे कि लोगों के बैठने तक की जगह नहीं थी ।

READER TODAY- LEADER TOMORROW 

लेख को अंत तक पढने के लिए धन्यवाद||

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